भदोही के असनाव स्थित मल्लूपुर रोड पर संचालित आदर्श चाइल्ड क्लिनिक को लेकर स्टिंग ऑपरेशन में गंभीर अनियमितताएं सामने आने का दावा किया गया है।
स्टिंग के दौरान एक डायरिया पीड़ित बच्चे को भर्ती कर ग्लूकोज की बोतल चढ़ाई जा रही थी। मौके पर कोई जिम्मेदार चिकित्सक या प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं मिला। क्लिनिक में मौजूद व्यक्ति ने कैमरे पर दावा किया, “यहीं मैं रहता हूं, मामा डॉ. अभय कुमार यादव कुछ समय के लिए आते हैं।”
स्टिंग के दौरान यह भी देखा गया कि एक कमरे में ही क्लिनिक संचालित किया जा रहा है, जहां दो बेड लगाकर मरीजों का इलाज किया जा रहा था। वहीं क्लिनिक में दवाइयां भी रखी गई थीं और बिना फार्मासिस्ट की मौजूदगी के दवाइयां बेचे जाने के आरोप भी सामने आए।
कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं। क्या बिना प्रशिक्षित स्टाफ और नियमित चिकित्सकीय निगरानी के बच्चों का इलाज किया जा सकता है? क्या संबंधित क्लिनिक के पास आवश्यक पंजीकरण और मानकों का पालन किया जा रहा है? और सबसे बड़ा सवाल—आखिर स्वास्थ्य विभाग की नजर अब तक इस क्लिनिक पर क्यों नहीं पड़ी?
मासूम बच्चों के इलाज से जुड़ा यह मामला बेहद संवेदनशील है। यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है।
अब निगाहें भदोही के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और स्वास्थ्य विभाग पर हैं। देखना होगा कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होती है या नहीं।
बिपिन मिश्रा (द रियल हिन्दुस्तान)









